कभी दूर लगे कभी पास लगे
तेरी हर बात मे एक अहसास लगे
मेरे बनते-टूटते ख्वाबो की
तू अंधेरी सूनी सी रात लगे...
मेरा रिश्ता तुझसे ऐसा है
मैं पंछी तो तू आकाश लगे
जैसे बरसो से सुलगती धरती पर
स्वयं इंद्र देव बरसात करे
तुझसे जब भी मिल जाउ मैं
कई जन्मो से है साथ लगे
बिछूड़ के तुझसे क्या जीना
ये जीवन है नापाक लगे
सुधीर राणा
तेरी हर बात मे एक अहसास लगे
मेरे बनते-टूटते ख्वाबो की
तू अंधेरी सूनी सी रात लगे...
मेरा रिश्ता तुझसे ऐसा है
मैं पंछी तो तू आकाश लगे
जैसे बरसो से सुलगती धरती पर
स्वयं इंद्र देव बरसात करे
तुझसे जब भी मिल जाउ मैं
कई जन्मो से है साथ लगे
बिछूड़ के तुझसे क्या जीना
ये जीवन है नापाक लगे
सुधीर राणा
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