Sunday, November 17, 2013

अहसास

कभी दूर लगे कभी पास लगे
तेरी हर बात मे एक अहसास  लगे
मेरे बनते-टूटते ख्वाबो की
तू अंधेरी सूनी सी रात लगे...

मेरा रिश्ता तुझसे ऐसा है
मैं पंछी तो तू आकाश लगे
जैसे बरसो से सुलगती धरती पर
स्वयं इंद्र देव बरसात करे

तुझसे जब भी मिल जाउ मैं
कई जन्मो से है साथ लगे
बिछूड़ के तुझसे क्या जीना
ये जीवन है नापाक लगे

सुधीर राणा

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