Friday, February 14, 2014

Tum aur Mein

कुछ तेरे उसूल है
कुछ मेरे उसूल है
ना तुझे कबूल है
ना मुझे कबूल है

की एक हो मंज़िल
या मिल जायें मोड़ पर
तेरी भी भूल है
मेरी भी भूल है

ना तुझे ज़रूरत है
ना मैं भिखारी हूँ
तुझे भी गरूर है
मुझे भी गरूर है

तू रंजिश मे पागल है
मैं चाहत से घायल हूँ
ना तेरा कसूर है
ना मेरा कसूर है !!

Pyar ka Khel

प्यार करने वालो ने ये
कैसा रचाया खेल है
एक डिब्बा खींचे दस इंजन
कैसी बनाई रेल है

बिजली चाहे बिजली को
बादल को चाहे बादल
कुदरत ने नियम बदल दिया
अब होता यूँ ही मेल है

हर कोई है इस बाज़ार मे
मुफ़्त मे बिक जाने को
फिर भी कीमतें नही चूकती
कैसी लगी ये सेल है

आशिक बनने के लिए भाई अब
सिर्फ़ पसीने से काम नही चलता
पहले खून नीचूड्ता है
फिर निकतला तेल है

प्यार करने की सज़ा अब
सीधे फाँसी (शादी) नही होती
गर सूली से बच जाओ
तो उमर भर की जेल है

प्यार के पप्पू का
परिणाम तो सुन लीजिए
जो ना समझा वो पास है
जो समझ गया वो फेल है !!

सुधीर राणा