जो सीमा पे रक्षा करता हो,
जो लू मे खेतो मे तपता हो,
जो ज्ञान की खोज मे रहता हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो देश की कमान संभाल सके!
जो मेरे देश के नाम पे उर खिले,
जो मेरे देश के नाम पे मर मिटे,
जो मेरे देश की हवा से महक उठे,
मेरा गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो गिरते हुए को संभाल सके!
मानवता जिसका धर्म हो,
परिश्रम जिसका कर्म हो,
जिसमे आगे बढ़ने की लग्न हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो सघनवर्धी मे मग्न हो !
जिसके उद्योग प्रयोग है,
जिसकी विद्या से योग है,
जिसके धन का उपयोग है,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो महज नही संयोग है !!
सुधीर राणा
जो लू मे खेतो मे तपता हो,
जो ज्ञान की खोज मे रहता हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो देश की कमान संभाल सके!
जो मेरे देश के नाम पे उर खिले,
जो मेरे देश के नाम पे मर मिटे,
जो मेरे देश की हवा से महक उठे,
मेरा गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो गिरते हुए को संभाल सके!
मानवता जिसका धर्म हो,
परिश्रम जिसका कर्म हो,
जिसमे आगे बढ़ने की लग्न हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो सघनवर्धी मे मग्न हो !
जिसके उद्योग प्रयोग है,
जिसकी विद्या से योग है,
जिसके धन का उपयोग है,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो महज नही संयोग है !!
सुधीर राणा
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