कुछ तेरे उसूल है
कुछ मेरे उसूल है
ना तुझे कबूल है
ना मुझे कबूल है
की एक हो मंज़िल
या मिल जायें मोड़ पर
तेरी भी भूल है
मेरी भी भूल है
ना तुझे ज़रूरत है
ना मैं भिखारी हूँ
तुझे भी गरूर है
मुझे भी गरूर है
तू रंजिश मे पागल है
मैं चाहत से घायल हूँ
ना तेरा कसूर है
ना मेरा कसूर है !!
कुछ मेरे उसूल है
ना तुझे कबूल है
ना मुझे कबूल है
की एक हो मंज़िल
या मिल जायें मोड़ पर
तेरी भी भूल है
मेरी भी भूल है
ना तुझे ज़रूरत है
ना मैं भिखारी हूँ
तुझे भी गरूर है
मुझे भी गरूर है
तू रंजिश मे पागल है
मैं चाहत से घायल हूँ
ना तेरा कसूर है
ना मेरा कसूर है !!