Sunday, November 17, 2013

नाता

मीत सुखों के साथ दुखों का बहूत पुराना नाता है,
उजियाले के बाद अंधेरा खुद चल कर आ जाता है,

यह मेरी मजबूरी साथी यह मेरी कमज़ोरी है,
जब भी काँटा चुभे किसी को मेरा दिल भर आता है,

सच तो यह है इस दुनिया में जो कल था वो आज नही है,
मगर मित्र क्यूँ इतिहास ये बार-बार दोहराता है,

की जिसने स्वयं को ढाल लिया है शुभ कार्मो के साँचे में,
वह पुरुष के पद से उठकर महापुरुष कहलाता है..!!

मुक्तक

(1) 

रातें गर सुहावनी हो तो दिन को जलना ही पड़ता है,

अपनो की ख़ुशी के लिए तो शंकर बनना ही पड़ता है,

ये तो चन्दन की खूबी है महक ही अस्तित्व है इसका,

की पानी को चलते रहकर दरिया बनना ही पड़ता है……



(2)

 दुनिया मे मुझे चाहने वालो की कमी लगी...
यहा पर आ पहुँचे फिर से जब सहारो की कमी लगी........ (सुधीर राणा)

(3)

बरसात होती रहेगी ताप घाटता रहेगा,
आप मिलते रहोगे मन मचलता रहेगा,
ये जिंदगी यू ही गुजर जाएगी,
सावन आता रहेगा बरसता रहेगा.......


(4)

मैं एक लता बिन बिसरे के कभी अम्बर ना छू पाऊंगी,
मैं बड़ी कितनी भी हो जाऊं पर तुझपर ही छऊँगी,
तेरे आँगन में पलकर भी मैं पराई एक दिन हो जाऊँगी,
बहन हूँ मैं इस जीवन क्या हर जन्म में साथ निभाऊंगी,

**
मेरा पत्ता - पत्ता भी तुझपर नौछावर करता हूँ,
तुम मेरे सर पर राज करो हर ढाल तेरी मैं बनता हूँ,
मैं तो तेरा साया हूँ कभी अलग नहीं हो पाऊंगा,
मेरी प्यारी बहन ये प्रण मेरा है हर दम पर साथ निभाऊंगा....

सुधीर राणा


(5)

लगता है आज की रात भी यूँ ही गुज़र जाएगी,
मेरे हिस्से में इंतज़ार, उनके हिस्से में इकरार, और हमारे हिस्से में तकरार.....
सुधीर राणा


(6)

कोई करके शरारत तेरा दिल चुराने को जी चाहता है
भूलकर दुख-दर्द सारे, तुझे हंसाने को जी चाहता है,
उस खुदा से नहीं कोई वास्ता,
तुम्हें खुदा बनाने को जी चाहता है।
तेरे बिना क्या जिंदगी मेरी,
हस सांस तेरे नाम करने को जी चाहता है..


(7)

रिवाज़ यही है दुनिया का, मिल जाना - बिछड़ जाना,
तुमसे ये कैसा रिश्ता है? ना मिलते हो ना बिछड़ते हो.......


(8)

हंसकर करले क़बूल 'वो' जो भी फ़ैसला करे,
जब अदालत महबूब की हो तो क्या अपील, क्या वक़ील, क्या दलील...???
 

(9)

तुम्हे पाने की चाहत कभी पूरी न हुई, जब भी तुम्हे खोया कोई मजबूरी सी रही,
ये जन्मो का सिलसिला तो यूँ रहा हमारे दरमियाँ, जैसे बारिश होकर भी प्यास अधूरी सी रही।।।।


(10)

सो जाता है हर कोई अपने आने वाले कल के लिए,
परंतु कोई ये नही सोचता,
की जिसका दिल दुखाया है वो सोया होगा की नही...


(11)

कभी तो कंधे उसके भी थक जायेंगे, जिसने मेरे अरमानो की अर्थी उठाई है,
ये दुनिया लाख फैसले कर ले खुद से, इनसे ऊपर भी तो रब की एक सुनवाई है। - सुधीर राणा


(12)

दिखा के सपने खा के कसमे तुमने अपना बना लिया
कुचल के सपने तौड के कसमे तुमने मुझे रुला दिया
बन के फरिश्ता दे के रिश्ता दूसरे पल ही भुला दिया
एक ही था ये दीपक रोशन क्यूँ इसको भी बुझा दिया

सुधीर राणा


(13)

या तो खुद भी बंदी हो जा, या मेरी भी जंजीरें काट,
अब बहूत हो गया तेरा-तेरा, कर दे मुझको भी आज़ाद...


(14)

ना जाने मुझसे वो कैसा रिश्ता निभाते है,
की दोस्त भी कहते है और वफ़ा भी नही करते...


(15)

जिंदगी मैं सबकुछ होता कब पूरा है..?
कल भी कुछ अधूरा था, आज भी कुछ अधूरा है....!!


(16)

सर्घी पूजा अन्न पानी
गले से कुछ भी ना उतरे
चाहे करू रोज ही करवा चौथ
मेरा चाँद तो फिर भी ना निकले...


(17)

दूसरो के सपनो की चिता जलाकर
लोग दीवाली मनाते हैं
किसी को सुख हो
किसी को दुख हो
बस अपना पक्ष निभाते हैं...


(18)

हिसाब तो तुम्हे देना होगा मेरे हर आँसू का एक दिन,
मैने जब - जब तुम्हे बताया है तूने तब - तब मुझे रुलाया है.....


(19)

दिमाग पे जोर डाल के गिनते हो गलतियाँ मेरी,

दिल पे हाथ रख के पूछना कसूर किस का था.......


(20)

नेकी के लिबास में तो हर कोई बदन ढकता है,
पर रोशनी के लिए तो कोई बिरला ही जलता है....


(21)

अक्ल के थोड़े कच्चे होते, पर दिल के होते सच्चे,
इन समाज के ठेकेदारो से तो नुक्कड़ के मजनू अच्छे....


(22)

महज एक भाषा नही ज़ज्बात है हिन्दी,
सुख दुख सांझा करने की सोगात है हिन्दी,
आओ मिलकर बचाएं अपनी इस जमा पूंजी को,
आज हमारी जवाबदेही की मोहताज है हिन्दी..


(23)

है धर्म भी अब तो डोल रहा, आपनों - परायों को तोल रहा,
बिक रही है इज़्ज़त सरे आम, लग रहा है ईश्वर का भी दाम......


(24)

बचपन था नाज़ुक हाथ थे, चीज़ें छूट जाती थी,
अब वक्त नाज़ुक है, चीज़ों से हम छूट जाते है.....


(25)

खुशी हो या उदासी सब उसके होने से है,
शोहरत हो या रुसवाई आँखो को तो रोने से है,
वक़्त वक़्त पे रूख़ बदलता है सब अपनो-परायो का,
दिल को मतलब वक़्त से नही उसके ख़ास होने से है.......


(26)

देश को नोच के खाया है कुर्सी के चाहने वालो ने,
मानवता को निलाम किया है इन समाज के ठेकेदारो ने,
दिल करता है शूली चढ़वा दूं इन कुर्सी के के रखवालो को,
धरती मे जिंदा गडवा दूं मानवता पे हँसने वालो को......


(27)

तुम जो मुझे मिल गये थे ये लगा की जहाँ मिल गया है,
तेरे इस जहाँ में भी हम थे अकेले आज हुमको भी महसूस हुआ है!!


(28)

वो कहते है की अब उनकी प्यार करने की उमर नही रही,
पर उनको कौन समझाए की प्यार कभी बूढ़ा नही होता......


(29)

ये कैसा रिश्ता है तेरे मेरे दरमियाँ?
की मेघ बरसने पर भी प्यास नही बुझती,

ये कैसा बंधन है तेरे मेरे दरमियाँ?
की बेड़ियाँ काट जाने पर भी आज़ादी नही मिलती....


                         


अहसास

कभी दूर लगे कभी पास लगे
तेरी हर बात मे एक अहसास  लगे
मेरे बनते-टूटते ख्वाबो की
तू अंधेरी सूनी सी रात लगे...

मेरा रिश्ता तुझसे ऐसा है
मैं पंछी तो तू आकाश लगे
जैसे बरसो से सुलगती धरती पर
स्वयं इंद्र देव बरसात करे

तुझसे जब भी मिल जाउ मैं
कई जन्मो से है साथ लगे
बिछूड़ के तुझसे क्या जीना
ये जीवन है नापाक लगे

सुधीर राणा

भारतवासी

जो सीमा पे रक्षा करता हो,
जो लू मे खेतो मे तपता हो,
जो ज्ञान की खोज मे रहता हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो देश की कमान संभाल सके!

जो मेरे देश के नाम पे उर खिले,
जो मेरे देश के नाम पे मर मिटे,
जो मेरे देश की हवा से महक उठे,
मेरा गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो गिरते हुए को संभाल सके!

मानवता जिसका धर्म हो,
परिश्रम जिसका कर्म हो,
जिसमे आगे बढ़ने की लग्न हो,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो सघनवर्धी मे मग्न हो !

जिसके उद्योग प्रयोग है,
जिसकी विद्या से योग है,
जिसके धन का उपयोग है,
मुझे गर्व है हर उस भारतवासी पर,
जो महज नही संयोग है !!

सुधीर राणा

Monday, February 4, 2013

इक सवाल तुमसे

तुम ही बताओ खुद को वापिस कहाँ से लाऊं ?
तुम्हे पाते - पाते अब मैं खुद से बिछुड़ चुका हूँ,

तुम खुद ही सोचो अब वो वजूद कहाँ से पाऊं ?
टूटने तक तो सही था पर अब बिखर चुका हूँ ,

नादान है ये दिल भी कैसे इसे समझाऊं ?
मंजिलें बहूत है बाकी पर अब मैं ही थक चुका हूँ ,

अनमोल हो तुम कितने कैसे तुम्हे बताऊँ ?
तुम्हारी ख़ुशी के लिए अब मैं कितना सिमट चुका हूँ ,

मुमकिन नहीं है मुड़ना अब लौट कैसे जाऊं ?
कोई राह नहीं है वापिस जिस डगर मैं चल चुका हूँ ,

सिर्फ आसुओं से अब मैं प्यास कैसे बुझाऊं ?
तेरे लिए ही तुझसे इस कदर तड़प चुका हूँ ,

ना और इम्तेहान लो कहीं हार मैं न जाऊं ,
अब तो यकीन कर लो की मैं तेरा हो गया हूँ !!