मीत सुखों के साथ दुखों का बहूत पुराना नाता है,
उजियाले के बाद अंधेरा खुद चल कर आ जाता है,
यह मेरी मजबूरी साथी यह मेरी कमज़ोरी है,
जब भी काँटा चुभे किसी को मेरा दिल भर आता है,
सच तो यह है इस दुनिया में जो कल था वो आज नही है,
मगर मित्र क्यूँ इतिहास ये बार-बार दोहराता है,
की जिसने स्वयं को ढाल लिया है शुभ कार्मो के साँचे में,
वह पुरुष के पद से उठकर महापुरुष कहलाता है..!!
उजियाले के बाद अंधेरा खुद चल कर आ जाता है,
यह मेरी मजबूरी साथी यह मेरी कमज़ोरी है,
जब भी काँटा चुभे किसी को मेरा दिल भर आता है,
सच तो यह है इस दुनिया में जो कल था वो आज नही है,
मगर मित्र क्यूँ इतिहास ये बार-बार दोहराता है,
की जिसने स्वयं को ढाल लिया है शुभ कार्मो के साँचे में,
वह पुरुष के पद से उठकर महापुरुष कहलाता है..!!
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