Friday, February 14, 2014

Tum aur Mein

कुछ तेरे उसूल है
कुछ मेरे उसूल है
ना तुझे कबूल है
ना मुझे कबूल है

की एक हो मंज़िल
या मिल जायें मोड़ पर
तेरी भी भूल है
मेरी भी भूल है

ना तुझे ज़रूरत है
ना मैं भिखारी हूँ
तुझे भी गरूर है
मुझे भी गरूर है

तू रंजिश मे पागल है
मैं चाहत से घायल हूँ
ना तेरा कसूर है
ना मेरा कसूर है !!

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